कविता: तानाशाह का मेनिफेस्टो



 
यक़ीनन उठाते रहना तुम सवाल
लेकिन होगा क्या, विषय, वचन, प्रतिवचन
हम तय करेंगे!

करते रहना तुम नीतिगत विरोध
लेकिन विपल्व, विरोध या है प्रतिशोध
हम तय करेंगे!

यक़ीनन हम पर लगाना आरोप
लेकिन उद्दंडता, आरोप या प्रत्यारोप
हम तय करेंगे!

बेशक लङना अधिकारों के लिए
लेकिन हक़, हिमाक़त या है बगावत
हम तय करेंगे!

लिखना छंद, काव्य, आलेख, अख़बार
लेकिन कलम, स्याही, मज़मून
हम तय करेंगे!

यक़ीनन अभिव्यक्ति होगी आज़ाद
लेकिन भाषा, भाष्य, ज़ुबान
हम तय करेंगे!

खुले होंगे विद्यालय, महाविद्यालय
लेकिन बोध, शोध, इतिहास
हम तय करेंगे!

बेरोकटोक करना धरने-प्रदर्शन
लेकिन उचित, अनुचित या प्रतिपक्षी षड्यंत्र
हम तय करेंगे!

यकीनन हो सकेगी अपील-दलील
लेकिन अंतिम फ़ैसला 
हम तय करेंगे!

@ दयाराम वर्मा, जयपुर 30 दिसंबर, 2023

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