कविता: नराधम हैं वे कौन




दो नवंबर, वर्ष दो हजार तेइस
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
कैम्पस की बाईस वर्षीय एक छात्रा!

अपहरण- गैंग रेप
दरिंदे थे पहुँचवाले रसूख़दार!

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एक से बढकर एक
संस्कारी, नारीवादी, झंडाबरदार
कहां है स्वयंभू वीर-भारती?
भीष्म, पार्थ, द्रोण, धर्मराज युधिष्ठिर
संजय या सारथी!

देते हैं साथ गुनाहगारों का 
धार लेते हैं मौन!
गुनाह से पहले, गुनाह के बाद
बतलाओ 
नराधम हैं वे कौन


[1] अंगारिता: पलाश की ताजा कली
[2] मानीख़ेज़: महत्वपूर्ण

 
@ दयाराम वर्मा जयपुर 24.01.2024

प्रकाशन: चिंग-तम अमत्तनि (कविता संग्रह) अगस्त 2026












कविता: मैदान-ए-जंग



व्हाट्स-ऐप, यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम
एक्स, फ़ेसबुक
आभासी, अथाह-अंतहीन ब्रह्माण्ड में
चल रही है
हर रोज चौबीसों घंटे, एक जंग!

दशों दिशाओं से बरसते हैं अविरत[1]
तल्ख़ शाब्दिक बाण
और दनादन दागे जाते हैं
मुत्तहम-परस्ती के आग्नेय प्रक्षेपास्त्र!

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[1] अविरत: लगातार
[2] कदीमी: पुरातन
[3] प्रसाधित: सुसज्जित
[4] चरित्र-हंता: किसी के चरित्र का अंत करने वाली
[5] अभिज्वाल्य: प्रज्वलित करने योग्य" या जलाया जा सकने वाला
[6] गल्प: मिथ्या प्रलाप
[7] संत्रास: भय, डर, त्रास

@ दयाराम वर्मा जयपुर 17.01.2024


प्रकाशन 1. चिंग तम अमत्तनि (कविता संग्रह) अगस्त 2026

चिंग-तम अमत्तनि (कविता संग्रह) नोशन प्रेस चेन्नई प्लेटफार्म पर निर्मित प्रकाशन की तिथी: 26 अगस्त, 2026 https://www.amazon.in/dp/B0HGMDJ3J3?...