कविता: नराधम हैं वे कौन

दो नवंबर, वर्ष दो हजार तेइस
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
कैम्पस की बाईस वर्षीय एक छात्रा!
अपहरण- गैंग रेप
दरिंदे थे पहुँचवाले रसूख़दार!
...............................................
..............................................
...........................
एक से बढकर एक
संस्कारी, नारीवादी, झंडाबरदार
कहां है स्वयंभू वीर-भारती?
भीष्म, पार्थ, द्रोण, धर्मराज युधिष्ठिर
संजय या सारथी!
देते हैं साथ गुनाहगारों का
धार लेते हैं मौन!
गुनाह से पहले, गुनाह के बाद
एक से बढकर एक
संस्कारी, नारीवादी, झंडाबरदार
कहां है स्वयंभू वीर-भारती?
भीष्म, पार्थ, द्रोण, धर्मराज युधिष्ठिर
संजय या सारथी!
देते हैं साथ गुनाहगारों का
धार लेते हैं मौन!
गुनाह से पहले, गुनाह के बाद
बतलाओ
नराधम हैं वे कौन
[1] अंगारिता: पलाश की ताजा कली
[2] मानीख़ेज़: महत्वपूर्ण
नराधम हैं वे कौन
[1] अंगारिता: पलाश की ताजा कली
[2] मानीख़ेज़: महत्वपूर्ण
@ दयाराम वर्मा जयपुर 24.01.2024
प्रकाशन: चिंग-तम अमत्तनि (कविता संग्रह) अगस्त 2026
प्रकाशन: चिंग-तम अमत्तनि (कविता संग्रह) अगस्त 2026

